केंद्र सरकार ने आज सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड-(सी.बी.एस.ई.) ने उन निजी छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक नई नीति बनाई है, जो हाल ही में ईरान-अमरीका संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुए थे। न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और विपुल एम. पंचोली की पीठ को महान्यायवादी तुषार मेहता ने बताया कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक नई अखिल भारतीय नीति तैयार की गई है।
श्री मेहता ने कहा कि कल अधिसूचित की गई इस नई नीति के तहत, बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले निजी छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक अलग फार्मूला विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनमें निजी छात्र द्वारा कक्षा 10 और पिछली बार दी गई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर परिणाम का आकलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत, जिन विषयों की परीक्षा रद्द की गई थी, उनके अंक दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक अंकों के 40 प्रतिशत और पिछली बार दी गई बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक अंकों के 60 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे।
सर्वोच्च न्यायालय सऊदी अरब के अल जुबैल के एक निजी छात्र की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने सीबीएसई को मूल मूल्यांकन योजना के अनुसार बारहवीं कक्षा की सुधार परीक्षा के परिणाम घोषित न करने के लिए चुनौती दी थी।