बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा है कि बेल्जियम भारत के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने बताया कि बेल्जियम से समुद्री और पत्तन क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल अगले वर्ष फरवरी में भारत का दौरा करेगा, ताकि इस क्षेत्र में ठोस कदम उठाए जा सकें। श्री वेवर आज मुंबई में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भारत-बेल्जियम उच्च स्तरीय चर्चा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता रणनीतिक खुलेपन, विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह भारत और यूरोपीय संघ दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को और मजबूत करेगा तथा वैश्विक अनिश्चितता के बीच उन्हें लचीला बनाए रखने में मदद करेगा।
प्रधानमंत्री वेवर ने कहा कि दुनिया में हिंसक संघर्ष बढ़ रहे हैं इसलिए ताकतवर साझेदार देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करना ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित और विश्वसनीय समुद्री आपूर्ति शृंखलाएं पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। श्री वेवर ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच महत्वपूर्ण समय पर आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ऐसा आधार प्रदान करेगा जिस पर भविष्य में कई प्रमुख योजना चलाई जा सकती हैं। उन्होंने उन देशों की भी आलोचना की जो दूसरों पर एकतरफा और अनुचित कर लगाते हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की दिशा में महाराष्ट्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद भारत की ओर रुख कर रही बेल्जियम की कंपनियों से भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए महाराष्ट्र को अपना पसंदीदा स्थान मानने का आह्वान किया। उन्होंने बेल्जियम और महाराष्ट्र के बीच चुनिंदा परियोजनाओं की पहचान करने और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक टीम गठित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बेल्जियम को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में महाराष्ट्र की यात्रा का हिस्सा बनने के लिए भी आमंत्रित किया।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बेल्जियम और भारत की अर्थव्यवस्थाएं पांच प्रमुख क्षेत्रों – हीरे और आभूषण, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और बंदरगाह, रक्षा और उन्नत विनिर्माण तथा कृषि और खाद्य प्रसंस्करण – में एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के सामने केवल दो ही विकल्प हैं – मौजूदा अस्थिरता में बह जाना या विश्वास के पुल बनाना।
इस अवसर पर दोनों देशों की विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि, राजनयिक अधिकारी और अन्य लोग उपस्थित थे।