कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस -एआई, अब कोई विकल्प नहीं बल्कि सुशासन का एक अनिवार्य स्तंभ है। उन्होंने एआई के उपयोग के महत्व पर बल दिया। जयपुर में आज 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशासनिक सोच में मूलभूत बदलाव की आवश्यकता है।
श्री सिंह ने कहा कि सरकार का न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन का सिद्धांत नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के निर्माण के प्रयासों को गति प्रदान कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने कुशल शासन में बाधा डालने वाले लगभग दो हजार पुराने नियमों को समाप्त कर दिया है, जिनमें दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन और कई अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। समारोह के दौरान, श्री सिंह ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार प्रदान किए। इस वर्ष सात श्रेणियों में कुल 17 पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें 10 स्वर्ण पुरस्कार और 6 रजत पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार उन पहलों को मान्यता देते हैं जिन्होंने डिजिटलीकरण के माध्यम से जमीनी स्तर पर सेवा वितरण को मजबूत किया है।