42 पूर्व न्यायाधीशों ने भारत की जनता को एक खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने लिखा है कि इस सब के केंद्र में चुनाव आयोग है और यहां तक कि उच्च न्यायपालिका और वैधानिक एजेंसियां भी इससे अछूती नहीं हैं। पत्र में चिंता व्यक्त की गई है कि भारत के संवैधानिक निकायों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निहित राजनीतिक स्वार्थों द्वारा चलाया जा रहा अभियान है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने के संभावित विनाशकारी परिणामों की कोई परवाह नहीं है।
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण-एसआईआर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के अंतर्गत वैध है। उन्होंने बताया कि पिछला एसआईआर लगभग दो दशक पहले पूरा हुआ था और किसी ने भी उन संशोधनों को साजिश नहीं कहा था। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को वैध और चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे में माना है। उन्होंने राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ने और उन्हें अवैध न ठहराने की अपील की। उन्होंने मीडिया से यह भी आग्रह किया कि वे दावों की जांच-पड़ताल और पुष्टि किए बिना अटकलों और अनुमानों को बढ़ावा न दें। पत्र में संवैधानिक निकायों से दृढ़ रहने, पारदर्शिता बनाए रखने और राजनीतिक खींचतान से दूर रहने का आग्रह किया गया।