अक्टूबर 14, 2026 9:38 अपराह्न

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज तेजी से बदलते युद्ध स्वरूप के बीच रक्षा बलों, डीआरडीओ, शैक्षणिक संस्थानों, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी उद्योग के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया। इनमें स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास, उन्हें अपनाने और निरंतर उन्नयन में तेजी लाने के लिए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना शामिल है। रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ फंडरेज़िंग अभियान के शुभारंभ के अवसर पर यह बात कही। श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियाँ, मानवरहित प्लेटफार्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष-आधारित प्रौद्योगिकियां सैन्य गतिशीलता को नया आकार दे रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी क्षमता के बीच बढ़ते अंतर्संबंध का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि आईआईटी अकादमिक अनुसंधान को परिचालन रक्षा आवश्यकताओं और उद्योग की जरूरतों के साथ जोड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के मजबूत संस्थानों के महत्व का भी उल्‍लेख किया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने छह हजार से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और लगभग पांच हजार पेटेंट के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि आईआईटी केवल ज्ञान प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि नवाचार, उद्यम और तकनीकी क्षमता के इंजन के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। आईआईटी कानपुर के डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र के बारे में बात करते हुए, श्री सिंह ने कहा कि इस तरह की साझेदारियां वैज्ञानिक प्रतिभा, संस्थागत विशेषज्ञता और रक्षा बलों के परिचालन अनुभव को एक मंच पर लाएंगी ताकि रणनीतिक महत्व की स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके। रक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वसनीय शैक्षणिक संस्थान अनुसंधान को व्यावहारिक रक्षा अनुप्रयोगों में बदलने और सेना की विकसित होती तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों और उद्यम के बीच एक सेतु का काम कर सकता है।

अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने अनुसंधान और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत एक लाख करोड़ रुपये का उल्लेख किया। श्री सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान मजबूत अनुसंधान क्षमताओं, उन्नत सुविधाओं, प्रतिभाशाली छात्रों के लिए अवसरों और राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहायक होगा।

‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान के माध्यम से, आईआईटी कानपुर का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर जुटाना है, जो किसी भी आईआईटी द्वारा चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा धन जुटाने का अभियान है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य आईआईटी कानपुर के अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करना, प्रतिभाओं का पोषण करना और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों एवं नवाचारों के विकास एवं व्यावसायीकरण में तेजी लाना है, ताकि 2047 तक भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

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