उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर सभी से पृथ्वी की रक्षा और संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आग्रह किया है। सोशल मीडिया पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विचारधारा में प्रकृति के साथ सामंजस्य का निरंतर समावेश रहा है। तमिल कवि तिरुवल्लुवर के एक कथन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘विविध जैव विविधता’ का अर्थ है संसाधनों के सजग और साझा उपयोग के माध्यम से सभी जीवित प्राणियों की देखभाल करना।
उपराष्ट्रपति ने देशवासियों को सतत जीवनशैली अपनाने और जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरणीय चुनौतियों के मद्देनज़र एक हरित और स्वच्छ भविष्य के लिए मिलकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी का सम्मान केवल एक दिन नहीं बल्कि प्रतिदिन किया जाना चाहिए।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नागरिकों को पर्यावरण अनुकूल कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यक्तिगत रूचियां पृथ्वी के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पृथ्वी दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पोस्ट में श्री यादव ने लोगों से अपील की कि वे सार्थक आदतें अपनाएं, प्रकृति का सम्मान करें और ऐसी जीवनशैली अपनाएं जो पृथ्वी को पोषित करें। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे रोज़मर्रा के जीवन में पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के सिद्धांतों को अपनाएं।